तुम्हे-चिंता
तुम्हे खाने की चिंता है
मुझे पाने की है ख्वाइश
तुम्हे जाने की इजाजत है
मुझे आने की उम्मीदें
तुम्हे हर सैय ने देखा है
मुझे हर सख्स ने चाहा है
तुम्हे न फुर्सत है हमारे लिए
मुझे न वक़्त है किसी और के खातिर
तुम्हे प्यार करता हु
तुम्हे ही तो है चाहा
तुम्हे देखा जो पहली बार आया था
तभी ये गीत लिख बैठा
जब हर सैय ने मुझे पुकारा था
तुमने खोने की आदत है
मुझे पाने की चाह है
तुम्हे सोने की चाहत है
मुझे जाने चिंता है
तुम अपने में महफूज हो इतने
हम खुदमे ही मजबूर है इतने
न जाने की चाहत है
न आने की है ख्वाइश
बस तुमसे दूर न हो जाऊ मै
इतनी ही तमन्ना है ,
हमें तुमसे मिलाने को हर सैय ने चाहा है
मुझे तुमसे मिलाने को हर गम ने छोड़ा है !!
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