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स्त्री /Stri Hindi Ghazal

दर्द बहुत सभाले है मैंने सोचा था बड़े होकर कुछ बन कर दिखाउंगी दिन रात एक करके कुछ दुनिया में नाम कर जाऊगी लेकिन क्या बताऊ बड़े होते ही माँ बाप ने कर दी परायी अपने उन चाँद आसुओ के साथ कर दी मेरी बिदाई सोचा कैसे सब कुछ सह पाउगी माँ बाप की ये जुदाई सब कुछ यहाँ का बहुत याद आएगा माँ के हाथ का खाना और मिढ़ाई भूलूंगी मैं कैसे अपनी किताबे और अपना भाई अपनी बहन के साथ वोह खट्टी मीठी लड़ाई लो अब एक पल में मैं तो हो गयी परायी जिसने इतने दिन दिल से इतने मेहनत से पाला मुझको आज उसी ने एक पल में मुझको कर दिया परायी !! दर्द बहुत सभाले है मैंने मेरा नाम है स्त्री !! मानो तो मैं माँ हु मानो तो बहन मानो तो अच्छी दोस्त मानो तो आपकी अर्धांगिनी !! लेकिन क्या कहु किससे कहु दर्द अपना मैं   दर्द बहुत सभाले है मैंने मेरा नाम है स्त्री !!

जन्म दिन

मुबारक - मुबारक   हो दोस्तां हमारा शायद अब ज़िन्दगी की शुरुआत है इस तन्हाई के मौसम में बस मेरे दोस्त तेरी याद है सोच रहा हु कुर्शी पर बैठा तेरे उस इजहार   का ऐ मेरे दोस्त दुनिया में कुछ करना है तो दुनिया नजर में पागल बनना है मुबारक मुबारक हो दोस्तां हमारा मेरे उज्वल है जीवन अपना जो मात पिता हम ऐसे पाए सजा रहे जीवन तेरा सौगातों से हो मुबारक जन्म दिन मेरी यादों से दोस्ती का ये मासाल है हमारा अब वह दिन दूर नहीं मेरे दोस्त जब जावा मेरी दोस्ती में आएगा

पिता एक छत

पिता एक छत. कहां चल दिए लाट साब... आज तो इतवार है, आज भी घर में नहीं रहना है तुमको.. तो घर में क्या करुं.... यहां बैठकर बस आपकी कड़वी बातें सुनता रहूं, नीचे मुंह करके रमेश बड़बड़ाया। एक दिन, एक घंटा क्या, एक मिनट भी नहीं पटती थी दोनों बाप-बेटों में....मानो तलवारें खिंची ही रहती हों, एक दूसरे के लिए और इन दोनों के बीच मां हर समय एक ढाल बन कर खड़ी रहती किन्तु वह ढाल भी कभी-कभी छन्न से नीचे गिर ही जाती और वाक युद्ध चरम पर होता था। ऐसा नहीं था कि रमेश एक बेकार और मुंह-जोर लड़का था, एक अच्छी नौकरी कर के भली-भांति जीवन-यापन कर रहा था...  पिता भूतपूर्व सैनिक थे आर्मी रिटायर्ड और उन्हें उनके सैन्य अनुशासन बहुत प्रिय थे। रमेश अपनी स्वतंत्रता चाहता था और पिता जी अपना पिता वाला रोबदार सैन्य अनुशासन...  रमेश जब भी परेशान होता तो पिताजी उसके बिना कहे उसकी सहायता करते, उसकी छोटी-मोटी जरूरतों को कभी मां-बहन द्वारा हल करते। उसे गलती करने पर डांटते और बडी हिदायत देकर काम कहते। जीवन बंदिशों में लगता था। शादी हुई, बच्चा हुआ, थोड़ा बड़ा होने पर उनके जीवन पाठ को समझने लगा तो छोडकर चले गये। आज उसके प...
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बिट्टू Meri Bittu

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तुझ बिन सुना जग सारा तुझ बिन सुनी आँखे है .... आ जाओ अब मेरी बिट्टू, प्यासे ये आँखे है .... हाँ पाप…
तरस जाओगे तुम मेरी आवाज

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तरस जाओगे तुम मेरी आवाज सुनने को।बरस बीतेंगे मगर मैं बोल नहीं पाऊंगा। मैं न तुमसे बोलूंगा ना तुम्हें…
बहना

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लिखा गया ग्रंथ जब मेरे इतिहास का तब शब्द में आयी मेरी बहना देखा गया जब मेरी जीवन गाथा तब देखा गया शब…
इस प्यार को क्या नाम दूं

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ऐ मोहब्बत तेरे इस प्यार को क्या नाम दूं बता तेरे इस प्यार को क्या नाम दूं। आज फिर से तूने मुझे बजाय…
what should I call this love

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aai mohabbat what should I call this love of yours, tell me what should I call this love of yours. …
जय माता दी

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मोहब्बत की निशानी देखनी है तो देखो मां के दरबार मां वैष्णो देवी के दरबार में जहा जिस भक्त से मां को…
अब मेरी हर बातें तुमको कितनी कड़वी लगती है

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अब मेरी हर बातें तुमको कितनी कड़वी लगती है । एक दिन वोह भी था शायद तुमको याद होगा ,जब हर वक्त तुम्ह…
MS क्वीन University

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तू लाख दूरियां बना ले ,तू लाख जिद कर ले , तू लाख परेशान मुझको कर ले ।लेकिन मैं आऊंगा ,मैं आऊंगा ,मै…
वक्त गुजर जाता है मगर तुम नही मिलते ।याद तो बहुत आती है मगर, मिल हम नही सकते ।

वक्त गुजर जाता है मगर तुम नही मिलते ।याद तो बहुत आती है मगर, मिल हम नही सकते ।

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आज फिर से तुम याद आ रहे हो

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आज फिर से तुम याद आ रहे हो आज पता नही क्यों तुम बहुत याद आ रहे हो  ,जिंदगी कुछ चंद पलों की मेहमान सी…
आया सावन आया झूम के

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आया सावन आया झूम के ,बरसे बदरा झूल के ,कालिया खिलने का मौसम आया आया सावन आया झूम के , पेड़ो की पत्त…
स्कूल की जिंदगी

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वोह जिंदगी भी क्या जिंदगी थी जैसे चाहा आजाद परिंदे सा उड़ा । वोह जिंदगी भी स्कूल की क्या जिंदगी थी । …
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बिदेश

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जब तक गांव में था शहर की चिंता थी जब शहर गया तब गांव पता चला  शहर गया तब दूसरे बड़े शहर में जाने की च…
रिश्ते

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रिश्ते भले ही बेवजह शुरू होते हों,लेकिन जाते वक़्त वो आपको दो चीज़ें दे जाते हैं ।पहली वो रिश्ते से…