जीवन/Jeewan
जीवन - मै अपनी किताब के माध्यम से किसी ब्यक्ति बिशेष को आहत करना नहीं चाहता हु ।और न ही यह मेरा उद्देश्य है मै बताना चाहुगा की जो समाज में चल रहा है मै केवल उसे ही सब के सामने रखना चहुंगा चाहे वो किसी पोलिटिकल पार्टी से हो ,चाहे वो किसी धर्म से या समुदाय से हो ।बस मै इतना ही अपनी किताब के माधयम से कहना चाहुगा की क्या चल रहा है और क्या इसका रिसल्ट होगा मै बस इतना ही बताने की कोशिश करना चाहुगा ।मै किसी को भी यह नहीं चाहता की उसको किसी प्रकार का कोई ठेश हो ।और किसी को होता भी है तो वो केवल गलत होगा ।तभी उसे मेरी लेखनी पर संदेह होगा या फिर उसे अज्ञानता होगी ! मुझसे भी गलती हो सकती है ।मेरी लेखनी में कुछ गलती हो सकती है लेकिन मै यह नहीं कह सकता हु की मै गलत हु क्यों की मै अपनी इस किताब में हर चीजों को प्रूफ कर कर दिखाऊंगा॥और इसे पड़ने वाले आसानी से समझ सकेंगे मै ऐसी अपेछा करता हु अपने प्रिय पड़ने वालों से ॥मै अपनी किताब में किसी भी धर्म या फिर किसी भी समुदाय को दर्द देना नहीं है मै जो भी देख रहा हु ।केवल उसे ही सही और करमबध्य तरीके से सुचारु ...
